Charchaa a Khas
भागलपुर ब्यूरो (कुंदन राज)
भागलपुर । बिहार दिवस के उपलक्ष्य में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर अन्तर्गत विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बिहार का अतीत और संभावनाएं विषय पर आयोजित संगोष्ठी का विषय प्रवेश वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ. उमेश प्रसाद नीरज ने कराया। डॉ. उमेश प्रसाद नीरज ने कहा कि बिहार का अतीत गौरवशाली रहा है। प्राचीन काल में बिहार ने न केवल भारत बल्कि एशिया की एक बड़े भूभाग का प्रतिनिधित्व किया था। तकनीकी, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में बिहार ने जो उपलब्धि हासिल की उसका लाभ पूरी दुनिया को मिला।
बिहार गौतम बुद्ध, महावीर और गांधी की कर्मस्थली रही है। बिहार से ही सम्राट अशोक ने पूरी दुनिया को शांति और अहिंसा का संदेश भिजवाया था। प्राचीन काल में बिहार जितना ही समृद्ध था आधुनिक काल में उतना ही पिछड़ता चला गया। पैमाना अपनाया गया है वास्तव में विकास का जो आधुनिक पैमाना है उसे पर बिहार का खरे न उतरना उसके पिछलेपन का कारण है। यद्यपि लोग यह मानते हैं की बिहार कृषि प्रधान राज्य है अगर कृषि को उद्योग का दर्जा दिया जाए और यहां के श्रम शक्ति का बेहतर प्रबंध किया जाए तो बिहार को विकसित राज्य की श्रेणी में लाया जा सकता है जन संसाधन के मामले में ही में भी बिहार बहुत आगे है। जल संसाधनों का सही दाम सही उपयोग ही बिहार को आगे ला सकता है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विभाग अध्यक्ष डॉ. अमित रंजन सिंह ने बिहार में विकास की संभावनाओं को विस्तार से बताया। विभाग अध्यक्ष ने कहा की बिहार विभाजन के बाद अधिकतर संसाधन झारखंड के हिस्से में चले गए लेकिन मानव संसाधन में बिहार आज भी अग्रणी है। मानव संसाधन का बेहतर प्रबंधन करके बिहार विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। इस दिशा में प्रयास भी किये जा रहे हैं। इसका फलाफल बिहार की विकास दर में भी दिख रहा है। आंतरिक संसाधनों का प्रयोग कर बिहार ने कृषि और इस पर आधारित उद्योगों में अच्छा काम किया है। संगोष्ठी का संचालन सहायक प्राध्यापक गौतम कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन सहायक अध्यापक मनोज कुमार दास ने किया। संगोष्ठी में सहायक प्राध्यापक गौतम कुमार, सहायक प्राध्यापक मनोज कुमार दास, डॉ देशराज वर्मा और डॉक्टर सीमा कुमारी और जेआरएफ नरेन नवनीत के साथ ही शोधार्थी वर्षा, साकेत, सागर, अनूप, मुकेश, सुनील, रोहित, मांडवी, नवनीत, राजीव, राजकुमार दास और अन्य छात्र-छात्राओं के साथ ही विभाग के कर्मी उमेश कुमार और रामचंद्र रविदास आदि मौजूद थे।